➤ हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बदाऊं गांव के निषाद कुमार ने एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीता
➤ ऊंची कूद के खिलाड़ी निषाद ने पहली बार लंबी कूद स्पर्धा में उतरते हुए 7.11 मीटर की छलांग लगाकर इतिहास रचा
➤ किसान पिता रछपाल और मां पुष्पा देवी के कड़े संघर्ष और त्याग के बीच निषाद ने यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बदाऊं गांव के रहने वाले निषाद कुमार ने एशियाई पैरा खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक जीता है। जापान के आइची नागोया में पुरुषों की टी-47 लंबी कूद स्पर्धा में उतरे निषाद ने 7.11 मीटर की छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया। खास बात यह है कि ऊंची कूद में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके 27 वर्षीय निषाद पहली बार लंबी कूद की स्पर्धा में उतरे और अपने पदार्पण में ही स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया।
फाइनल मुकाबले में निषाद ने बेहद शानदार शुरुआत की। उन्होंने पहले प्रयास में 6.95 मीटर और दूसरे प्रयास में 7.09 मीटर की छलांग लगाई। इसके बाद तीसरे प्रयास में 7.11 मीटर की दूरी तय कर उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। चौथे प्रयास में फाउल होने के बावजूद उनका आत्मविश्वास कम नहीं हुआ। पांचवें प्रयास में भी उन्होंने 7.11 मीटर की छलांग दोहराई, जबकि छठे और अंतिम प्रयास में 7.07 मीटर की दूरी तय की। इस बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अब निषाद अपनी मुख्य स्पर्धा यानी टी-47 ऊंची कूद में भी चुनौती पेश करेंगे, जिसमें वह विश्व रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर हैं।
निषाद कुमार का यह सफर संघर्ष और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक मिसाल है। बचपन में एक हादसे में हाथ कट जाने के बावजूद उन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को कभी अपनी सफलता की राह में बाधा नहीं बनने दिया। स्कूल के दिनों से ही उन्होंने खेलों में अपनी असाधारण प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी। बेहतर प्रशिक्षण की तलाश में वर्ष 2017 में निषाद महज 2,500 रुपये लेकर पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स पहुंचे थे, जहां कोच नसीम अहमद ने उनकी प्रतिभा को पहचाना।
इसके बाद वर्ष 2019 में उन्हें बंगलूरू के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में कोच सत्यनारायण के मार्गदर्शन में अभ्यास का अवसर मिला। इसी वर्ष दुबई में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इसके अलावा उन्होंने वर्ष 2021 में दुबई में एशियाई रिकॉर्ड बनाया तथा टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक खेलों में रजत पदक अपने नाम किए। खेलों में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनकी इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का त्याग भी अहम रहा है, जहां किसान पिता ने सब्जियां उगाईं और मां ने मवेशी पालकर दूध बेचकर बेटे के सपनों को पंख दिए।



